संदेश

मुकदमा

कभी ऐसा भी करो, बिठाओ एक अदालत, चलाओ खुद पर मुकदमा, वादी भी तुम,  प्रतिवादी भी तुम, दागो तीखे सवाल,  खोलों आरोपों के सिरे, मन के कटघरे में खड़े तुम, करते रहो जिरह, फिर देखो मिलता है कारावास, या हो जाते हो मुक्त।  ©

लड़कियां

कितनी अच्छी लगती हैं न, पढ़ती लड़कियां, बढ़ती लड़कियां, लड़ती-झगड़ती लड़कियां, प्रश्न करती, उत्तर खोजती लड़कियां, सजती-संवरती लड़कियां, संभलती-संभालती लड़कियां, खिलखिलाती- खुशियां बिखेरती लड़कियां, नाजुक-नरम सी मजबूत लड़कियां, जमीन नापती, आसमान निहारती लड़कियां, ©

प्रेम के रूप...

किसी ने प्रेम को सम्मान कहा, किसी के लिए समर्पण बन गया, कुछ परिभाषित करते रहे, कुछ इसमें आकंठ डूब गए, किसी ने शाब्दिक रूप में अधूरा पाया, कोई एक पल में पूरा जी गया, कभी यह राह कठिन लगा, कभी हर मझधार का पतवार बना, किसी के लिए भ्रम, छलावा बना, किसी के जीवन का अंतिम सुख, परम आनंद बहुरूपिया प्रेम,  सबके लिए एक अलग रूप में आता है,  जो जैसा हो, वैसा प्रेम बन जाता है। © #श्वेता #पंक्ति

मन्नत का धागा...

तुम मन्नत का धागा हो, प्राचीन मंदिर के बूढ़े पीपल की टहनी पर बांध छोड़ा है, मन में रहते हो, होठों तक नहीं आते, सुना है, मन्नत बोल दो, तो पूरी नहीं होती, उम्मीद है, किसी दिन उस प्राचीन मंदिर जाउंगी, एक-एक गिरह खोल, तुम्हें स्वतंत्र कर दूंगी।  © #पंक्ति #श्वेता

समय ने सिखाया...

समय ने सिखाया, जहां तुम्हारी अनुपस्थिति से अंतर न पड़े, वहां उपस्थिति अर्थहीन है, हर युद्ध जीतना आवश्यक नहीं, कुछ को छोड़ देना श्रेयस्कर है, वह रिश्ते जो प्रेम में पगे हृदय में न बसे हों, केवल आदत के साथी हो, खींच लो उस रिश्ते की डोर, बहुमूल्य हो तुम,  किसी को अपना मूल्य समझाना व्यर्थ, प्रेम पहले "स्व" से करो, इसलिए प्रेम से पहले आत्मसम्मान को चुनो... © #पंक्ति #श्वेता

एक सफर'नामा...

निकले थे एक सफर पर, और चल पड़े अनंत यात्रा पर, कुछ सपने और ज्यादा सामान, अपनों का साथ,  पर अब साथ अपनी देह भी नहीं, कुछ को विदा कर, किसी से मिलना था, विदा पूरी हुई, मुलाकातें हमेशा के लिए रह गईं, पिछला घरौंदा छोड़, नये आशियाने को बसाना था, तमाम तैयारियां धरी रह गईं, अलमारियां, दराजे खाली रह गईं, पहली उड़ान कुछ यूं रही कि अब अपने मुझसे स्वप्न में मिलेंगे,  संगिनी की "राख" गंगा में प्रवाहित हुई, और मैं "राख" बन गया, कई बातें, मुलाकातें, सपनें, सौगातें, अचानक आई मौत ने सब छीन लिया... © #पंक्ति #श्वेता (अहमदाबाद प्लेन क्रैश में प्राण गंवा चुके यात्रियों के नाम 🙏) #AhmedabadPlaneCrash #Poem #journeyoflife

यदि हो प्रेम...

यदि हो प्रेम, उसे स्वतंत्र कर दो, तुमसे जुड़ाव होगा, तो वो दूर न होगा, रहेगा आसपास, जैसे रहती है हवा, जैसे रहती है रोशनी, खुद से मत बांधो, नहीं तो कुंभला जाएगा, जैसे कुंभला जाता है, डाली से टूटा पुष्प, प्रेम को रहने दो, उन्मुक्त, स्वच्छंद।  © #पंक्ति #श्वेता