निकले थे एक सफर पर, और चल पड़े अनंत यात्रा पर, कुछ सपने और ज्यादा सामान, अपनों का साथ, पर अब साथ अपनी देह भी नहीं, कुछ को विदा कर, किसी से मिलना था, विदा पूरी हुई, मुलाकातें हमेशा के लिए रह गईं, पिछला घरौंदा छोड़, नये आशियाने को बसाना था, तमाम तैयारियां धरी रह गईं, अलमारियां, दराजे खाली रह गईं, पहली उड़ान कुछ यूं रही कि अब अपने मुझसे स्वप्न में मिलेंगे, संगिनी की "राख" गंगा में प्रवाहित हुई, और मैं "राख" बन गया, कई बातें, मुलाकातें, सपनें, सौगातें, अचानक आई मौत ने सब छीन लिया... © #पंक्ति #श्वेता (अहमदाबाद प्लेन क्रैश में प्राण गंवा चुके यात्रियों के नाम 🙏) #AhmedabadPlaneCrash #Poem #journeyoflife