मन्नत का धागा...
तुम मन्नत का धागा हो,
प्राचीन मंदिर के बूढ़े पीपल की टहनी पर बांध छोड़ा है,
मन में रहते हो, होठों तक नहीं आते,
सुना है, मन्नत बोल दो, तो पूरी नहीं होती,
उम्मीद है, किसी दिन उस प्राचीन मंदिर जाउंगी,
एक-एक गिरह खोल, तुम्हें स्वतंत्र कर दूंगी।
©
#पंक्ति #श्वेता
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