यदि हो प्रेम...

यदि हो प्रेम,
उसे स्वतंत्र कर दो,
तुमसे जुड़ाव होगा,
तो वो दूर न होगा,
रहेगा आसपास,
जैसे रहती है हवा,
जैसे रहती है रोशनी,
खुद से मत बांधो,
नहीं तो कुंभला जाएगा,
जैसे कुंभला जाता है,
डाली से टूटा पुष्प,
प्रेम को रहने दो,
उन्मुक्त, स्वच्छंद। 

©
#पंक्ति #श्वेता

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