समय ने सिखाया...

समय ने सिखाया,
जहां तुम्हारी अनुपस्थिति से अंतर न पड़े,
वहां उपस्थिति अर्थहीन है,

हर युद्ध जीतना आवश्यक नहीं,
कुछ को छोड़ देना श्रेयस्कर है,

वह रिश्ते जो प्रेम में पगे हृदय में न बसे हों,
केवल आदत के साथी हो, खींच लो उस रिश्ते की डोर,

बहुमूल्य हो तुम, 
किसी को अपना मूल्य समझाना व्यर्थ,

प्रेम पहले "स्व" से करो,
इसलिए प्रेम से पहले आत्मसम्मान को चुनो...

©
#पंक्ति #श्वेता

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