बिछड़ना
मिले तो थे, बिछड़ने के वादे के साथ,
फिर क्यों वो तेरा पहली बार अपना कहना याद आता है,
क्यों वो तेरा हाथ छुड़ा कर जाना याद आता है।
बढ़ चुके हैं हम आगे, फिर क्यों तेरा पीछे छूट जाना याद आता है,
मुक्कमल हैं जिंदगी मेरी, फिर क्यों उस आधे ख़्वाब का टूट जाना याद आता है।
तू न तो साथी था, न दिया साथ कभी, फिर भी क्यों तेरी वो सोहबत याद है।
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