वो लड़की छतरी वाली

वो लड़की छतरी वाली,
सतरंगी फुलों से सजी छतरी वाली,
भीगती सड़क पर फुदकती सी,
ज़रा भीगती कुछ बचती सी।

कभी खुद संभलती,
कभी छतरी को संभालती सी,
घुंघराले काले खुले बालों को झटकती सी,
छोटे-छोटे गड्ढे से जब झपाक पानी पड़े,
तो कभी भौंहे सिकोड़ती,
तो कभी दुपट्टे को झटकती सी,
भीड़ में खोकर भी कुछ-कुछ अलग सी,
वो लड़की छतरी वाली।

छोड़ कर छतरी को उसका भी जी चाहता है भीगने को,
लेकिन दुनियादारी की परवाह में मन को मसोसती सी वो,
हाथों पर बूंदों को लेकर मन में भीगती सी वो।

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