बावरी, नकचढ़ी ख्वाहिशें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेखक: Shweta Pandey जुलाई 25, 2016 मेरी ख़्वाहिशें भी बावरी, नकचढ़ी, जिद्दी सी हैं,कभी तोला, तो कभी माशा और कभी वो पिद्दी सी हैं। लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
मुकदमा लेखक: Shweta Pandey अगस्त 17, 2025 कभी ऐसा भी करो, बिठाओ एक अदालत, चलाओ खुद पर मुकदमा, वादी भी तुम, प्रतिवादी भी तुम, दागो तीखे सवाल, खोलों आरोपों के सिरे, मन के कटघरे में खड़े तुम, करते रहो जिरह, फिर देखो मिलता है कारावास, या हो जाते हो मुक्त। © और पढ़ें
लड़कियां लेखक: Shweta Pandey जुलाई 29, 2025 कितनी अच्छी लगती हैं न, पढ़ती लड़कियां, बढ़ती लड़कियां, लड़ती-झगड़ती लड़कियां, प्रश्न करती, उत्तर खोजती लड़कियां, सजती-संवरती लड़कियां, संभलती-संभालती लड़कियां, खिलखिलाती- खुशियां बिखेरती लड़कियां, नाजुक-नरम सी मजबूत लड़कियां, जमीन नापती, आसमान निहारती लड़कियां, © और पढ़ें
यदि हो प्रेम... लेखक: Shweta Pandey जुलाई 18, 2025 यदि हो प्रेम, उसे स्वतंत्र कर दो, तुमसे जुड़ाव होगा, तो वो दूर न होगा, रहेगा आसपास, जैसे रहती है हवा, जैसे रहती है रोशनी, खुद से मत बांधो, नहीं तो कुंभला जाएगा, जैसे कुंभला जाता है, डाली से टूटा पुष्प, प्रेम को रहने दो, उन्मुक्त, स्वच्छंद। © #पंक्ति #श्वेता और पढ़ें
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