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महज 'ख़बर' बन गईं तुम

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खुला खत - प्रत्यूषा के नाम,  डियर प्रत्यूषा, अब तुम वहां हो, जहां न तो किसी की सदाएं सुनाई देंगी और न ही तुम्हारी कोई ख़बर तुम्हारे अपनों तक ही आ पाएगी। ख़ुद को ख़त्म करने का फैसला यक़ीनन तुमने काफ़ी सोचने के बाद ही लिया होगा। जब तुम इस फैसले पर अमल कर रही होगी, तब ख़ुद पर गुस्सा भी आया होगा और कुछ कोफ़्त भी ऊपर वाले पर हुआ होगा ।  प्रत्युषा बनर्जी अब तो तुम चली गईं, लेकिन ज़िंदगी इतनी बुरी भी नहीं होती कि उसे जिया न जा सके। फ़ैसले कभी ग़लत या सही नहीं होते, उनके नतीज़े ही सब तय करते हैं। तुम्हारे जाने के बाद कई रो रहे हैं, कुछ अफसोस जता रहे हैं, तो कोई मीडिया के सामने आने का एक मौक़ा भुना रहा है। तुम्‍हें जो करीब से नहीं भी जानता, वो सब तुम्हारे वर्तमान से भूतकाल के ब्यौरे दे रहे हैं। कई समीकरण सामने आ रहे हैं। लेकिन उन चार जोड़ी आंखों से बहते आंसू को कोई नहीं देख रहा है। कोई उनकी परवाह भी नहीं कर रहा है। अरे वही, जिन्‍हें दुनिया तुम्‍हारे माता -पिता के नाम से जानती है। ठीक ही तो है, जब तुमने उनकी कोई परवाह नहीं की, तो भला दुनिया क्यों परवाह करेगी। मशहूर धारावाहिक में केंद्र...