मुलाकात और वादा
कई दिनों बाद आज मुलाकात तय हुई थी। चैटिंग, कॉलिंग का एक लंबा दौर चलने के बाद मिलने की योजना बनी। सोशल नेटवर्किंग साइट पर हुई दोस्ती अमूमन उतनी विश्वसनीय नहीं मानी जाती। लिहाजा, एक-दूजे को समझने के बाद भी "कुछ" बाकी रह गया। दोस्ती से मामला पसंदीदगी तक पहुंच गया था, लेकिन मुकम्मल होना बाकी था। कई बार आगे की जिंदगी की प्लानिंग हो चुकी थी, लेकर मुलाकात बाकी थी। आज बस वही मुलाकात होनी है। कैफे कॉफी डे को चुना गया। दोनों एकांत या प्राइवेसी नहीं चाहते थे। तय समय पर मिले। आमने सामने पहली मुलाकात थी। दोनों में झिझक थी। धीरे-धीरे सब नॉर्मल हुआ। चोर नजरों से उसे देखता, जब पकड़ा जाता तो उंगलियों से भौंहे संवारने लगता। इस बार उसे घूरते हुए बोली, "क्या है? नॉर्मल नहीं रह सकते।" "क्या करूं तुम तस्वीर से ज्यादा सुंदर हो। काश कि मैं भी गा पाता, तो अभी गाने लगता।" हंसते हुए कहता है। आंखे तरेरते हुए कहती है, "हो गया मजाक, तो कुछ कायदे की बात हो जाए?" "क्या हम पॉलिटिक्स पर चर्चा करने वाले हैं?" माथे पर सिकन लाते हुए पूछा। तकरीबन घूरते हुए बोली, "न...