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मई, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुलाक़ात, ज़रा सी बात

एक भूली-बिसरी ख़्वाहिश अचानक टकरा गई, टकटकी लगाए निहारती रही, फिर बाजू पकड़ बैठा लिया। फिर खुला उसक शिक़ायती पिटारा, एक के बाद एक उलाहनों का दौर शुरू हुआ। बातों का सिलसिला क...